छत्तीसगढ़ में कलचुरी-शासन के पहले दो प्रमुख राजवंशों का शासन रहा।

Kalchuri-governance | Apna Chhattisgarh

आदिकाल में कोशाम्बी से दक्षिण-पूर्वी समुद्र तट की ओर जाने वाला प्राचीन मार्ग भरहुत, बांधवगढ, अमरकंटक, खरौद, मल्हार तथा सिरपुर से होकर जगन्नाथपुरी की ओर जाता था। इतिहासकारों के अनुसार यह एक महत्वपूर्ण शहर था। यहां से प्राप्त सिक्कों और अन्य अवशेषों से कई राजवंशों की झलक मिलती है।

सातवाहन शासकों की मुद्रा मल्हार उत्खनन से प्राप्त हुई है। रायगढ़ जिले से एक सातवाहन शासक आपीलक का सिक्का प्राप्त हुआ था। वेदिश्री के नाम की मृणमुद्रा यहां प्राप्त हुई हैं। इसके अतिरिक्त सातवाहन कालीन कई अभिलेख गुंजी, किसरी, कोणा, मल्हार, सेमरसल, दुर्ग, आदि स्थलों से प्राप्त हुए है। मल्हार उत्खन्न से ज्ञात होता है कि इस क्षेत्र में सुनियोजित नगर-निर्माण का प्रारंभ सातवाहन-काल में हुआ। इस काल के ईंट से बने भवन एवं ढप्पांकित मृद्भाण्ड यहाँ मिलते हैं। मल्हार के गढ़ी क्षेत्र में राजमहल एवं अन्य संभ्रांत जनों के आवास एवं कार्यालय रहे होंगे। दक्षिण-कोसल याने छत्तीसगढ़ में कलचुरी-शासन के पहले दो प्रमुख राजवंशों का शासन रहा। वे हैं शरभपुरीय तथा सोमवंशी। इन दोनों वंशो का राज्यकाल लगभग 325 से 655 ई. के बीच का माना जाता है। धार्मिक तथा ललित कलाओं के क्षेत्र में यहां विशेष उन्नति हुई। इस दौरान इस क्षेत्र में ललित कला के पाँच मुख्य केन्द्र विकसीत हुए। मल्हार, ताला, खरौद, सिरपुर तथा राजिम।

 

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